डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र बाधाएं एवं संभावनाएं

डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र बाधाएं एवं संभावनाएं

डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र की शुरुआत के 2014 से 6 साल हो गए परंतु अभी भी कुल एक करोड़ पेंशन धारकों में से सिर्फ करीब 16.7 लाख को ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर जीवन प्रमाण पत्र जमा करवाना संभव हो पाया है इसके मूल में कई कारण माने जा सकते हैं, यथा :-लोगों में जानकारी एवं डिजिटल प्लेटफार्म के प्रति विश्वास का अभाव, दिन प्रतिदिन मोबाइल एवं कंप्यूटर के माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी की घटना , आधार संख्या एवं मोबाइल संख्या को आम करने में हिचक ,अज्ञानता अथवा अल्पज्ञानता | अति निम्न वर्ग आय के लोगों के पास मोबाइल या कंप्यूटर ना होने के कारण यथोचित ज्ञान के बढ़ोतरी में बाधा एवं स्व उपयोग कर पाने हेतु संसाधन की अनुपलब्धता, अति वृद्ध होने के कारण हाथ के निशान मिट जाने की वजह से आधार वेरिफिकेशन में परेशानी ,कहीं-कहीं बैंकों में भी डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा करने संबंधी जागरूकता एवं जानकारी का अभाव , भूत में बैंकों द्वारा बरती गई लापरवाही यथा भौतिक जीवन प्रमाण पत्र लेकर भी कंप्यूटर में नहीं डाले जाने के कारण पेंशन भुगतान में हुई अनियमितता के कारण लोगों में अविश्वास का भाव कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जीवन प्रमाण पत्र जमा करने से मेरे जीवन प्रमाण पत्र जमा करने का कार्य निष्पादित हो जाएगा , एवं भौतिक रूप से जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की छूट आदि |

उपरोक्त कारणों के अलावा अगर जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की प्रक्रिया के विस्तार में जाया जाए तो :-

भारतवर्ष में करीब एक करोड़ पेंशनभोगी हैं जिन्हें नियमानुसार प्रत्येक वर्ष नवंबर दिसंबर माह में जीवन प्रमाण पत्र जमा करना होता है जिससे यह पता चल सके कि पेंशनर जीवित है सामान्य पेंशनरों के लिए दो तरह का प्रमाण पत्र जमा करना पड़ता है- उनके जीवित रहने का एवं उनके अन्यत्र नौकरी करने/ न करने का| फैमिली पेंशनरों के लिए तीन तरह के प्रमाण पत्र का प्रावधान है –जीवन प्रमाण पत्र, /पुनर्विवाह होने /न होने का प्रमाण पत्र एवं अन्यत्र नौकरी करने/न करने का प्रमाण पत्र

कभी-कभी जीवित रहने के बावजूद पेंशनरों के लिए बीमारी ,अधिक उम्र होने पर अपने स्थायी स्थान पर अनुपलब्धता आदि कारणों से जीवन प्रमाण पत्र जमा करना संभव नहीं हो पाता जिससे उनका पेंशन भुगतान बाधित हो जाता है।

जीवन प्रमाण पत्र जमा करने के दो तरीके हैं प्रथम भौतिक रूप में नियत शाखा में जाकर अनुलग्नकों के साथ जीवन प्रमाण पत्र जमा करना एवं द्वितीय डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा करना |

डिजिटल जीवन प्रमाण, जीवन प्रमाण पत्र जमा करने का एक नवीन सहज व सुलभ साधन है | डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा करने हेतु भारत सरकार ने नवंबर 2014 में jeevanpramaan.gov.in नामक एक पोर्टल की शुरुआत की ,इस पोर्टल पर जाकर पेंशनर खुद अपने एंड्रॉयड फोन या विंडो फोन या कंप्यूटर के लिए क्लाइंट सॉफ्टवेयर डाउनलोड हेतु ईमेल का अंकन कर लिंक प्राप्त कर सकते है, जिससे क्लाइंट सॉफ्टवेयर को डाउनलोड किया जाता है। कुछ आधारभूत जानकारियां एवं आवश्यकताएं हैं ,यथा आधार संख्या का खाता से जुड़ा होना, मोबाइल नंबर की उपलब्धता एवं बायोमैट्रिक डिवाइस की उपलब्धता | जिस बायोमैट्रिक डिवाइस का हमें उपयोग करना होता है, उसके आरडी सर्विस को हमें एप्लीकेशन स्टोर से डाउनलोड करना होता है।  डाउनलोड किए गए जीवन प्रमाण सॉफ्टवेयर में लॉग इन करने के उपरांत , पेंशनर के आधार संख्या, खाता संख्या एवं पीपीओ की विवरणी को भरना पड़ता है साथ ही किस-किस प्रमाण पत्र यथा जीवन प्रमाण पत्र ,पुनर्विवाह होने /न होने का प्रमाण पत्र अथवा नौकरीसुदा होने/न होने का प्रमाण पत्र जमा करना है इसका अंकन करना होता है |इन सारी प्रक्रिया को करने के बाद मोबाइल या कंप्यूटर से बायोमेट्रिक डिवाइस को लगा कर उंगली के छाप से अंकित किए गए विवरण का सत्यापन किया जाता है| सत्यापन होने के बाद मोबाईल संख्या पर सरल सन्देश सेवा के माध्यम से जीवन प्रमाण पत्र जमा होने का एक आईडी आता है साथ ही उस एप्लीकेशन पर प्रमाण पत्र जमा हो गया इसकी भी जानकारी दी जाती है। डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट के लिए एक रिपोजिटरी का निर्माण होता है जिसमें सारे जमा किए गए डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र सुरक्षित रहते हैं यहां से जब आवश्यकता हो पेंशन भुगतान करने वाली संस्था उसको देख सकती है एवं यह सुनिश्चित कर सकती है कि उक्त पेंशन धारक का जीवन प्रमाण पत्र डिजिटल फॉर्म में जमा किया गया है अथवा नहीं। अगर स्वयं जमा करना संभव ना हो पाए तो जीवन प्रमाण पत्र केंद्र एवं उक्त बैंक की शाखा में जाकर भी डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा किया जा सकता है एवं उसकी पावती प्राप्त की जा सकती है।

उपरोक्त पोर्टल के अतिरिक्त भारत सरकार ने उमंग(UMANG) नामक एक एप्लीकेशन बनाया है जिसको सहजता से एंड्रोइड /विंडो मोबाइल के प्ले स्टोर में जाकर डाउनलोड किया जा सकता है| इस एप्लीकेशन के माध्यम से न सिर्फ डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा करने बल्कि अन्य अनेक सुविधाओं के उपभोग की भी सहजता से उपलब्धता है।

jeevanpramaan.gov.in साइट पर जाकर पेंशन भुगतान करने वाली संस्था अथवा पेंशनर के बैंकर पेंशन के अकाउंट नंबर का जिक्र कर / पेंशन पेमेंट ऑर्डर के नंबर को अंकित कर अथवा जीवन प्रमाण पत्र के आईडी नंबर की मदद से यह जानकारी ले सकते हैं कि उक्त पेंशन धारक के डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र को जमा किया गया है अथवा नहीं|

उपरोक्त प्रक्रिया हलाकि काफी जटिल नहीं परन्तु फिर भी सबों के लिए इसका उपयोग सहज भी नहीं, क्योंकि सभी लोग पूर्णत कंप्यूटर मोबाइल अथवा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग कर कार्यों का निष्पादन करने में सक्षम नहीं है।

इसके बावजूद बैंक को एवं पेंशन धारियों को जीवन प्रमाण पत्र जमा करने में होने वाली परेशानियों से बचाव के लिए उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना ही होगा ऐसा करने हेतु कुछ सार्थक सुझाव निम्नलिखित हैं :

  • पेंशनरों को इसके बारे में समझाना होगा एवं विश्वशनीयता के प्रति आश्वस्त करना होगा |
  • रिजर्व बैंक ने सभी लोगों को डिजिटल के अलावा भौतिक रूप में जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की छूट दे रखी है अगर यह छूट सिर्फ उन लोगों तक ही सीमित रखा जाए जो किसी कारण विशेष जैसे बायोमैट्रिक ऑथेंटिकेशन नहीं हो पाना ,अति निर्धन होना आदि के चलते डिजिटल जीवन पत्र प्रमाण नहीं जमा पर कर पा रहे हो एवं चरणबद्ध तरीके से भौतिक जीवन प्रमाण पत्र जमा करने का विकल्प कम करने एवं अंततोगत्वा खत्म करने से इस दिशा में सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों में सफलता मिलेगी परंतु ऐसी स्थिति में यह सुनिश्चित करना होगा कि जीवन प्रमाण पोर्टल एवं सरकार द्वारा बनाए गए उमंग एप्लीकेशन पूरी तरह से काम कर रहे हो |
  • अक्षम वर्ग को डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा करने हेतु मुख्यधारा में लाने के लिए सरकार बैंक एवं समाज सभी को एक साथ मिलकर काम करना होगा तब ही हम पूरी तरह से जीवन प्रमाण पत्र को डिजिटल रूप में शत-प्रतिशत जमा होना सुनिश्चित कर पाएंगे|
  • आज वयोवृद्ध लोगों के हाथ में भी स्मार्टफोन उपलब्ध है पेंशन विभाग एवं बैंक द्वारा उनके मोबाइल पर एसएमएस के माध्यम से डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की विधि सरलता एवं सुगमता से क्षेत्रीय भाषा में अगर बताई जाए तो जिस मोबाइल का उपयोग वे सिर्फ अपने खाते की जमा निकासी की जानकारी हेतु करते हैं ,उसका उपयोग वे डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा करने हेतु कर सकते हैं |
  • पेंशनरों की मासिक मीटिंग एवं पेंशनर्स एसोसिएशन में भी डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की विधि के बारे में बताना होगा कि इस विधि से जीवन प्रमाण पत्र जमा करना न सिर्फ आसान होगा वरन पारदर्शिता भी बनी रहेगी |
  • पेंशनरों का पीपीओ जिस विभाग से निर्गत हो उसी के पीछे डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की संपूर्ण विधि को अंकित करना भी एक लाभप्रद कदम होगा |
  • शाखा द्वारा एवं विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा नवंबर महीने जिसमें लाइफ सर्टिफिकेट जमा करना होता है उस समय डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा करने हेतु साक्षरता शिविर का आयोजन भी अत्यंत ही लाभप्रद होगा।


आलेखकर्ता:-
शक्ति सिन्हा
स्टेट बैंक ज्ञानार्जन एवं विकास संस्थान ,पटना

1 thought on “डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र बाधाएं एवं संभावनाएं”

Leave a Comment

%d bloggers like this: