भविष्य की बैंकिंग सेवा

आज दिनांक 8 जनवरी 2050 है और मेरी कलाई में लगे ब्रेसलेट के सेंसर से 8 घंटे की नींद की जानकारी होते हीं टीवी खुद ब खुद समाचार का चैनल लगाकर मेरा मनोवांछित इंटरटेनमेंट न्यूज़ दिखाने लगी| टूथब्रश पकड़ते हीं  मुझे पता चला कि इसको इस्तेमाल करते 30 दिनों से ज्यादा हो चुके हैं| मैं अपने दांतो को साफ करने के लिए नया ब्रश ले लिया, तभी मेरे इलेक्ट्रॉनिक सेंसर से आवाज आई “आपके घर के कर्ज की किश्त  कटने के बाद क्रेडिट कार्ड में अब सिर्फ ₹3000 की ऋणसीमा बकाया है|” मैंने अपनी मोबाइल में अपने बैंक के अद्भुत यू नो (Wonderful You Know)* नाम के एप्प को खोलकर अद्वितीय पूछें (Unique Ask)* नामक कॉर्नर में जाकर अपने सारे खाता का बकाया जमा शेष जानने हेतु प्रश्न किया| मेरे फोन के टॉर्च लाइट रुपि प्रोजेक्टर ने एक रोशनी से मेरे सफेद पर्दे पर मेरे सारे खातों की विवरणी बारी-बारी से पेश करना शुरू कर दिया| रोबोट अब तक मेरे सारे घर की साफ-सफाई कर चुका था और मेरे लिए ब्रेड मशीन से निकले दो गरमा-गरम ब्रेड पर मक्खन लगा रहा था| मैंने सोचा कि ऑफिस जाते समय रास्ते में वर्चुअल बैंक (Virtual Bank) शाखा का भ्रमण किया जाए| वर्चुअल बैंक (Virtual Bank) शाखा  जो कि कंप्यूटरों और सेंसरों से भरा ऑफिस हुआ करता है और जिसमें एक समय में एक व्यक्ति का ही प्रवेश संभव है, उसके अन्दर पहुंचते हीं आवाज़ आई – “गुड मॉर्निंग मिस्टर सिन्हा आप अपने ऋण खाते या बचत खाते का बैलेंस जानना चाहते हैं , या कोई अन्य सेवा चाहते हैं ”, “अन्य सेवाओं की जानकारी हेतु  सामने लगे कंप्यूटर पर जाएं|” उक्त कंप्यूटर पर कुछ उत्पाद के बारे में जानकारी का डिस्प्ले चल रहा था| यह देखकर मैं आश्चर्यचकित हुआ कि जानकारी पटल पर जैसे ही मैंने स्पर्श किया उस उत्पाद की विवरणी जानकारी पटल  पर दृष्टिगत हुई| इसके साथ तुरंत मेरे ईमेल पर उसकी विवरणी आ गई और मेरे मोबाइल के ऑटो रीडर से वह जानकारी मिलने लगी| मेरी खुशी चौगुनी तब हो गई जब मैंने यह अनुभव किया कि उत्पाद को बैंक से मेरे द्वारा लिए गए सेवाओं के आधार पर मेरी संभावित आवश्यकता के अनुरूप प्रस्तुत किया जा रहा था | सुननें/पढ़ने के बाद भी मुझे लगा कि इसे लूं या नहीं इसके लिए संबंधित व्यक्ति की सलाह चाह रहा था| परन्तु यह बिलकुल  कंप्यूटरीकृत शाखा थी, यहां कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था| मैंने अपने ऑफिस की ओर रुख किया वहां जाकर पूरी जानकारी को मैंने अपनी मोबाइल फोन पर  विस्तार से पढ़ा| दूसरे दिन सुबह मैं बैंक के संपर्क केंद्र पंहुचा| वहाँ सिर्फ दो व्यक्ति पदस्थापित थे| उनलोगों नें 3D ग्राफिक विजुअल संसाधन के माध्यम से मुझे मेरे द्वारा पूछे प्रोडक्ट के लाभों के बारे में समझाया| उसके बाद मैंने उनसे कार ऋण के बारे में भी पूछताछ किया|  यह जानते हीं कि मैं कार ऋण का इच्छुक हूँ , सामने बैठे अधिकारी ने फेस रीडर एप्स से मेरे आंखों की पुतलियों को स्कैन करके झट मुझे ₹28,00,000/-के पूर्व अनुमोदित वाहन ऋण सम्बंधित संस्वीकृत पत्र मेरे मेल पर भेज कर उसे पढ़ने को कहा जिसे मैंनें  ऑटो रीडर से सुना| मैं पूरी तरह से आश्चर्यचकित था| पूछे जाने पर सामने बैठे अधिकारी  ने बताया कि आधार कार्ड बनाते समय आपके आंखों की पुतलियों का निशान लिया गया था जिसके माध्यम से आपके खाते का पता कर  खाते में मौजूद अन्य विवरणों के माध्यम से आपका CIBIL निकाला गया| तदुपरांत बैंक के नियत दिशानिर्देशों के अनुसार आपका पूर्व अनुमोदित वाहन ऋण सम्बंधित संस्वीकृत पत्र  खुद ब खुद आपके खाते में अंकित ईमेल में स्वचालिताते में अंकित इ मशीन के माध्यम से आपको भेजा गया है| एक अन्य ईमेल के माध्यम से मुझे बताया गया  कि (* ये नाम काल्पनिक हैं जिन्हें आलेख की जरूरत के अनुसार दिया गया है |) एक अन्य अधिकारी को मेरा रिलेशनशिप अधिकारी निर्धारित किया गया है| वह मेरे कार्य से संबंधित सारे दस्तावेजों की जानकारी एवं सारी कार्यवाही हेतु मुझसे विडियो कॉल से संपर्क करेंगे| मेल में जवाब के साथ समय अंकित कर मैंने रिलेशनशिप अधिकारी से मीटिंग तय कर ली| सोचकर मैं आश्चर्यचकित हुआ कि  मेरे  विद्यालय के दिनों (करीब 2020 ई०) की बैंकिंग प्रणाली एवं  अभी की बैंकिंग में कितना बदलाव आ गया है| तब शाखा में लोगों की भीड़ हुआ करती थी अब तो शाखाएं ही नहीं है|  जो शाखाएं हैं भी वह पूर्णत व्यक्ति रहित हैं| मुझे सेवा से इतनी संतुष्टि मिली कि अगर फीडबैक लिया जाता तो मैं ग्राहक संतुष्टि में शत प्रतिशत अंक देता| (भविष्य की बैंकिंग सेवा)

भविष्य की बैंकिंग सेवा
भविष्य की बैंकिंग सेवा

अब आगे ……

अगर हम 2020 ई० में अपने आप को रखकर सोचें तो  उपरोक्त लिखी पंक्तियों को पढ़कर ऐसा लगता है जैसे हम एक दूसरे ग्रह की परिकल्पना कर रहे हैं| तेजी jique  से परिवर्तित हो रही दुनियाँ को देखकर ऐसा महसूस होता है कि आने वाले समय की बैंकिंग व्यवस्था कुछ ऐसी ही होगी| सारे अधिकारी एवं कर्मचारी मार्केटिंग में लगे होंगे| जो बातें अभी असंभव लग रही है वो संभव एवं स्वीकृत होंगी| शाखा के नाम पर या तो पूर्णता कंप्यूटरीकृतशाखा होगी अथवा एक या दो व्यक्तियों द्वारा संचालित शाखा होगी जो पूर्णता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(AI) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स(IoT) जैसे तकनीकों पर कार्य कर रही होगी| ऐसे में क्या बैंकों में नौकरियों के अवसर नहीं होंगे? ऐसा नहीं है, क्योंकि समाज में तकनीकी विकास के साथ जनसंख्या में भी विस्तार होगा| सेवा पाने वाले लोगों के साथ-साथ सेवा देने के लिए व्यक्तियों/मशीनों की आवश्यकता होगी| बहुत से कार्य मशीन नहीं कर सकते हैं एवं मार्केटिंग जैसे कार्यों के लिए अधिक से अधिक संख्या में व्यक्तियों की आवश्यकता होगी| इस तरह से अगर हम देखें तो शाखा बैंकिंग न होकर बिना शाखा के व्यक्तिगत सेवा देने वाले सेवा अधिकारियों के रूप में बैंकों की नई पहचान होगी जो ग्राहकों को उनके द्वार पर बैंकिंग सेवाओं को देने में तकनीकी एवं भौतिक रूप से सक्षम होंगे| शायद वही  दिन होगा जब हम पूर्णतया ग्राहक परमानंद अथवा ग्राहक संतुष्टि जैसे शब्दों को सार्थक कर पाएंगे परंतु यह संभावना तब बनती है जब शत प्रतिशत लोगों को बैंकिंग सेवा  से जोड़ा जाएगा एवं सारे कार्य डिजिटल मोड में कर पाना संभव हो पाए| इसके लिए न सिर्फ अपने समाज के तकनीकी साक्षरता दर को बढ़ाना होगा बल्कि मोबाइल क्रांति एवं इंटरनेट सेवाओं को भी अभी से ज्यादा दुरुस्त करना होगा| जनसंख्या विस्तार के साथ शाखाओं की अधिकता की तो आवश्यकता नहीं पड़ेगी परंतु लोगों के अधिकता की आवश्यकता पड़ेगी जिससे कि वे ज्यादा से ज्यादा नए-नए तरीकों से प्रणालियां विकसित कर नए-नए बैंकिंग उत्पाद शुरू करें एवं समाज के विकास में सहयोगी बने| क्या आने वाले समय में ऐसी बैंकिंग सेवा संभव है कि बिल्डिंग के किसी प्रोजेक्ट के अनुमोदन  होते ही उस जगह पर मौजूद सारे प्रॉपर्टी से तुलनात्मक अध्ययन कर एवं बिल्डर द्वारा मांग  किए जाने वाले पैसे एवं सरकारी मूल्य का तुलनात्मक अध्ययन कर सीधे-सीधे हमारे सभी योग्य ग्राहकों को पूर्व अनुमोदित गृह ऋण का प्रस्तावना पत्र  दिया जा सके, इसका उत्तर बिलकुल हाँ होगा क्योंकि वर्तमान में ही हमारे पास पूर्व अनुमोदित व्यक्तिक ऋण,पेंशन ऋण, विभिन्न तरह के टॉप अप ऋण आदि उत्पाद हैं, जिसमें हमारे बैंकों  में एनालिटिकल इंजन (Analytical Engine) के माध्यम से लोगों की योग्यता को जांच कर उनको योग्यता राशि तक पूर्व अनुमोदित ऋण सीमा  स्वीकृत की  जाती है जिसे वे अपनी इच्छा अनुसार ले सकते हैं| वर्तमान में हम व्यवसाय संबंधी ऋण हेतु न सिर्फ दुकान या व्यवसाय  के सारे स्टॉक की जांच पड़ताल करते हैं बल्कि उनके सारे कागजातों की भी पड़ताल की जाती  है| क्या भविष्य में यह संभव हो पाएगा कि सिर्फ व्यवसायी के आधार संख्या या पैन संख्या डालने पर उनकी योग्यता  उनके सारे बैलेंस शीट एवं अन्य देयताओं एवं आस्तियों का विवरण निकाल कर उन्हें एक पूर्व अनुमोदित ऋण का स्वीकृति पत्र दिया  जा सके| अगर बैंकों में हो रहे तकनीकी विकास की स्थिति देखें तो यह बिल्कुल संभव है| तो हम जो भविष्य में 2050 ई० में स्थिति की परिकल्पना कर रहे हैं उस ओर हमारे  बैंक उन्मुख है और उम्मीद है कि न सिर्फ हमारे  बैंक बल्कि पूरे समाज की सारी व्यवस्थाएं 2050ई०तो क्या 2030ई० तक हीं पूर्णत: तकनीक पर आधारित होगी एवं अनावश्यक रूप से समय  बर्बाद किए बगैर काफी सुविधाएं प्राप्त हो पाएंगी  जिसके लिए अभी काफी वक्त बर्बाद करना पड़ता है| पूर्व में भी अगर हम देखें तो शाखाओं का कंप्यूटरीकरण काफी आसानी से हो गया| पूरे भारत को कोर बैंकिंग से जोड़ने जैसे दुरूह कार्य भी समय सीमा के अंदर पूरे कर लिए गए| जब मैनुअल कार्य हुआ करते थे तो किसी नें कल्पना भी नहीं की होगी कि श्रीनगर से कोई व्यक्ति चेन्नई के अपने खाते में कुछ पल में पैसा भेज  पाएगा| सिर्फ 2000 ई० से 2010 ई ० तक 10 वर्षों में बैंकों की तकनीक में हुए परिवर्तनों पर दृष्टि डालें तो  ऐसा कहना  अतिशयोक्ति नहीं होगी कि शुरूआती अनुच्छेद में वर्णित 2050ई० तक परिकल्पित तकनीक का विकास बैंकिंग प्रणाली 2030ई० तक ही कर लेगी|

भविष्य की बैंकिंग सेवा 

अंततः यही कहा जा सकता है कि आने वाले समय की बैंकिंग तकनीकों से भरी, द्रुत सेवा प्रदान करनें में सक्षम, व्यक्तिक आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पाद प्रस्तावित करनें योग्य एवं पारदर्शिता से परिपूर्ण होगी| साथ ही सरकारी योजनाओं का भी कार्यान्वयन  तब ज्यादा असरदार तरीके से  हो पाएगा|

ये बातें कोरी कल्पनाएँ नहीं वरण साक्ष्यों पर आधारित संभावित तथ्य हैं| सत्य अधिकतर सपने एवं परिकल्पनाओं से भी ज्यादा रोचक एवं रोमांचक होते है| अतः भविष्य का यथार्थ इससे ज्यादा सुविधाजनक हो सकता है और बनिस्पत ज्यादा विस्मित कर सकता है| पूरा विश्व इस दिशा में त्वरित गति से बढ़ रहा है|

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आलेखकर्ता

(शक्ति सिन्हा)

मुख्य प्रबंधक (प्रशिक्षण)

भारतीय स्टेट बैंक ज्ञानार्जन एवं विकास संस्थान ,पटना

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